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Wednesday, October 13, 2010

मेरे लिए विजय का वह क्षण अद्भुत क्षण था - कृष्णा पूनिया


केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री डॉ0 सी.पी. जोशी ने की स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली एथलीट श्रीमती कृष्णा पूनिया को पांच लाख रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा

नई दिल्ली । केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री डॉ0 सी.पी. जोशी ने दिल्ली में हो रहे 19 वें राष्ट्रमंडल खेलों में एथलेटिक्स में 52 साल बाद पहला स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली एथलीट श्रीमती कृष्णा पूनिया को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई देते डॉ0 जोशी ने उन्हें राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से पांच लाख रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। डॉ. जोशी ने बताया कि यह राशि एक दिसम्बर को जयपुर में एक सम्मान समारोह में प्रदान की जाएगी। उस दिन जयपुर में न्यूजीलैण्ड और भारत के बीच एक दिवसीय क्रिकेट मैच है और डॉ. जोशी राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। डॉं. जोशी ने बुधवार को दिल्ली में अपने कृषि भवन स्थित कार्यालय में श्रीमती कृष्णा पूनिया से मुलाकात कर उन्हें इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी। डॉं. जोशी ने कहा कि उन्होंने देश का गौरव बढाया है। श्रीमती कृष्णा पूनिया की उपलब्धियां खिलाडियों के लिए प्रेरणादायी है। इस मौके पर श्रीमती कृष्णा पूनिया के पति और कोच वीरेन्द्र सिंह पूनिया उनके साथ थे।
राजस्थान के चूरू जिले के गागरवास गांव की रहने वाली श्रीमती कृष्णा पूनिया ने डॉ. जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त कर मेरा राजस्थान की पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट एथलीट बनने का सपना पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि ‘‘मेरे लिए विजय का वह क्षण अद्भुत क्षण था’’। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. जोशी के नेतृत्व में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन दूसरे खेलों के प्रोत्साहन के लिए भी इसी तरह आगे आता रहेगा। पांच लाख रुपये. की पुरस्कार राशि की चर्चा करते हुए स्वर्ण पदक विजेता ने कहा कि मै जोशी जी का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने मेरा ही नहीं सभी खिलाडियों का सम्मान किया है।

Saturday, October 2, 2010

थे मत आया


क्षेत्र के मूर्धन्य साहित्यकार श्री सत्यनारायण 'अमन' द्वारा चार दशक पूर्व लिखी गई 'थे मत आया' कविता आज के इस अवसरवादी परिपेक्ष्य में सटीक साबित हो रही है। आज अगर गांधीजी जिंदा होते तो ये माहौल देखकर खून के आंसू रोते-

गांधी जी चलग्या सुख पाया।
आ भ्रिस्टाचारी देख-देख,
काळा-बाजारी देख-देख,
ईं भाटां मारी भारत री
तस्कर-ब्योपारी देख-देख,
बा खोड़ पांवती दुख भया-
गांधीजी चलग्या सुख पाया।
ना तो अब धोळा भड ज्यांता,
छाती में राध पड़्यां सरती,
बीं डैण बापड़ै री आंख्या,
धरती में आज गड्यां सरती।

आ पटमेळी तो होणी ही,
चौड़ै आ ज्यांता परवाड़ा,
डभळी सी रोज भिळ्यां सरती,
इण कापडिय़ां री करतूतां,
छाती पर मूंग दळयां करती।
जे बापू कीं चूं-चां करता,
आडी देंता,
का चेलां नै कीं मोर-फोट जे
कै लेंता?

तो खद्दरिया,
स्हो कीं बिसरा,
सै भूल-भुला,
गुण-गाळ होय नै,
पल भर में,
कपड़ां स्यूं बारै हो लेंता,
औरंगजेब बण बापू नै,
खल्लै में पाणी प्या देंता,
ऐ नाकां चिणा चबा देंता।
गांधी-टोपी नै फाड़-फूड़,
टुकड़ा-टुकड़ा कर-
चरखै नै,
बाळण रै भाव बिका देंता।

ऐ कळछ-कळछ पड़ता सिगळा,
कळ-झळ कर भुं आयो बकता,
बापू नै कैंता-
'आं' री तो,
साठी बुध नाठी हुई आज,
म्हे साच कवां हां,
मानो सा।
इण री भगती में भंग पड़्यो,
गांधी री मत तो आंधी है,
ना देखै कीं आगो-पाछो,
ना भलै-बुरै रो ग्यान अठै,

जद ही तो ऐड़ा हाल हुया,
थे जाणो हो?
कण कियो देस नै खंड-खंड?
कण धरम-करम बरबाद कियो?
आ नीत अहिंसा है किण री-
जिण कारण इतरो रगत बयो?

आ सुणता जद,
तद के होंतो?
सै जाणै है।
बो आप डोकरो जाणै हो,
इण खातर आछो चल्यो गयो,
बो भर्यै भरम में चल्यो गयो।

जे रै ज्यांतो दो-च्यार बरस,
तो रंग ल्यांवती परवाई,
कै तो पंडत गांधी बणतो,
का गांधी करतो पंडताई।
पण फबगी अब,
बा आंख फूटगी,
पीड़ मिटी,
सै दूधां न्हाया सा होग्या,
ना पोत दियो,
ना भूंड मिली।

अब जड़ी मूरत्यां घर-घर में
सै तस्वीरां में गांधीजी,
अब राजघाट पर गांधी है,
बिड़लै-मिंदर में गांधी है,
ईं कास्मीर स्यूं लेकर कै-
कन्याकुमार तक गांधी है,
कै घणी कवूं
थे स्याणा हो
गांधी चेलां री चांदी है।

इसड़ा गांधी परणाम तनै,
सै समझै हैं इन्सान तनै,
पण हूं मानूं भगवान तनै,
इण खातर
हे भगवान!
तनै,
परणाम तनै, परणाम तनै!!
ओ आज जलम-दिन है थांरो,
आदर्स बण्यो म्हां सिगळां रो।
इण दिन माथै,
हूं अरज करूं
छोटी सी,
जे थे मान्या तो,

जुग-जुग तक अमर रवोला थे।
पूजैला और पुजावैला,
ऐ चेला-चांटी घर-घर जा,
गांधी री अलख जगावैला।

पण साची मान्या,
हरख-कोड,
ऐ कूड़ा लोग दिखाऊ है।
मत जीव डुलाया आं माथै,
जे जलम ले लियो अबकाळै,
तो माटी हुवै बिरान अठै,
अरदास करूं हूं बाबलिया,
थे सुणज्यो बैठ्या जठै-कठै।

ऐ न्होरा काढ बुलावै ला,
ऐ मोरां ज्यूं किररावै ला,
पण भूल-चूक ही भारत री-
धरती पर बापू मत आया।
यूं समझो मरग्या सुख पाया॥

कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए सदस्यता अभियान चलेगा: मील



श्रीगंगानगर । युवक कांग्रेस के श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र के नवनिर्वाचित अध्यक्ष हनुमान मील ने कहा है कि कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सदस्यता अभियान चलाया जायेगा। इसके लिए एक सप्ताह के अन्दर पंचायत, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाई जायेगी। इस बैठक में युवक कांग्रेस को सक्रिय करने की भूमिका पर रूपरेखा तय की जायेगी। हनुमानगढ़ में आज संवाददाताओं से बातचीत करते हुए श्री मील ने बताया कि लोकसभा युवक कांग्रेस की प्रत्येक माह में बैठकें की जायेगी। बैठकों में होने वाले कार्यों की समीक्षा की जायेगी। श्री मील ने बताया कि हनुमानगढ़, संगरिया, पीलीबंगा, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर, विजयनगर, पदमपुर इत्यादि क्षेत्रों का सघन भ्रमण कर युवक कांगे्रस को मजबूत बनाने और संगठन को सक्रिय किये जाने के सार्थक प्रयास किये जायेंगे। प्रैस वार्ता हनुमानगढ़ विधानसभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह, संगरिया के प्रतिनिधि कुलदीप, ओबीसी प्रकोष्ठ विधानसभा महासचिव अमित कासनियां, कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक मनोज सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। इससे पहले नवनिर्वाचित लोकसभा अध्यक्ष हनुमान मील के हनुमानगढ़ पहुंचने पर युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हनुमान मील का गर्मजोशी से स्वागत कर युवक कांग्रेस को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

Tuesday, September 28, 2010

किसानों को नहीं मिल रहा फसलों का पूरा मूल्य

श्रीगंगानगर । प्रदेश में आज खरीद केन्द्रों में अव्यवस्था के चलते किसानों को उनकी फसलों का पूरा मूल्य नहीं मिल पा रहा। प्रदेश सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। यह कहना है कि भाजपा नेता रामपाल जाट का। वे मंगलवार को विधायक राधेश्याम गंगानगर के निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खरीद केन्द्र की व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को उनकी फसलों का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता। समर्थन मूल्य कम होने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। जाट ने कहाकि पिछले दिनों बरसात के कारण मूंग की फसल खराब हो गई, लेकिन सरकार ने इस ओर कोई गौर नहीं किया। संकट से घिरे किसानों की समस्या के समाधान के लिए प्रदेश सरकार को बार-बार अवगत करवाए जाने के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यदि राज्य सरकार इस तरह का रवैया अपनाती रही, तो आने वाले दिनों में किसान आंदोलन करने को विवश होंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से आयात के लिए जो पैसा विदेशों में दिया जा रहा है, उस पैसे को अगर किसानों को बिजाई के लिए दे दिया जाये, तो देश दलहनों के क्षेत्र में स्वावलंबी बन जायेगा। उन्होंने बताया कि पूर्व में एक कुण्टल नरमा और एक तोला सोना के भाव बराबर होते थे, आज सोना के भाव 19 हजार पचास रुपए से अधिक हैं।
श्री जाट ने अंदाजा लगाते हुए कहा कि प्रदेश में इस बार 9.48 लाख हेक्टेयर में मूंग की फसल बोई गई। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार मूंग का उत्पादन 3.95 लाख मैट्रिक टन होने की संभावना है। फसल खराब होने पर मूंग के भाव 1800रुपए प्रति कुण्टल से नीचे गिर रहे हैं। कृषि विभाग मंूग की फसल पर प्रति बीघा बिजाई पर कम खर्च मानता है जबकि खर्च अधिक आता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों को स्थायी क्रय केन्द्र घोषित करके समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद शुरू की जाये। पे्रस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सांसद निहालचंद, भाजपा जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह सोढी, भाजपा नेता शिव स्वामी, पंचायत समिति प्रधान बबलदीप कौर उपस्थित थी।

Monday, September 27, 2010

इंदिरा गांधी नहर परियोजना

रेगुलेशन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जनसुनवाई कैम्प अक्टूबर, नवम्बर व दिसम्बर में

श्रीगंगानगर । इंदिरा गांधी नहर परियोजना के सतर्कता गुण नियंत्रण एवं रेगुलेशन से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए माह अक्टूबर, नवम्बर व दिसम्बर-2010 में जनसुनवाई कैम्प आयोजित किए जाएंगे। अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता सतर्कता गुण नियंत्राण एवं रेगुलेशन इंदिरा गांधी नहर परियोजना बीकानेर ने बताया कि 4 व 18 अक्टूबर, 8 व 22 नवम्बर तथा 6 व 20 दिसम्बर-2010 को जन संसाधन विभाग के विश्राम गृह श्रीगंगानगर में जनसुनवाई कैम्प आयोजित किए जाएंगे। आयोजित शिविर में कोई भी किसान रेगुलशन से संबंधित अपनी समस्या दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक बताकर लाभ ले सकेंगे।

"हम आर्थिक एवं वैचारिक रूप से आज भी गुलाम"


भारत स्वाभिमान यात्रा के तहत सूरतगढ़ पहुंचे योग गुरु

सूरतगढ़ । बाबा रामदेव ने कहा कि हम भौगोलिक रूप से भले ही आजाद हो गए हैं, लेकिन आर्थिक एवं वैचारिक रूप से आज भी गुलाम बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि पहले एकमात्र विदेशी कम्पनी ईस्ट इण्डिया ही थी जबकि आज करीब 300 मल्टी नेशनल कम्पनियां देश को लूटने में लगी हुई है। वहीं देश के अरबों रुपये विदेशी बैंकों में जमा है, जिसे भारत में लाने की आवश्यकता है। बीसीयों प्रकार के टैक्स लगाकर लोगों को बेईमान बनाया जा रहा है। भारत स्वाभिमान यात्रा के तहत सूरतगढ़ पहुंचे योग गुरु ने अनाज मण्डी में रविवार देर शाम आयोजित हजारों लोगों की सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि श्रेष्ठ राष्टïर का निर्माण करना इस यात्रा का एकमात्र ध्येय है। भारत स्वाभिमान यात्रा के जनक व योग गुरु बाबा रामदेव ने राजयोग से राजरोग मिटाने का आह्वïान करते हुए कहा है कि पहले योग से देह के रोग मिटाए हैं, अब राजयोग से सत्ता में पनपे भ्रष्ट तंत्र को समाप्त करने का बीड़ा लोगों के सहयोग से उठाया है।
योग गुरु ने कहा कि आज जहां भ्रष्टïचार देश को खोखला कर रहा है वहीं मल्टीनेशनल कम्पनियां देशवासियों को लूटने में लगी हुई है। भारतीय भाषाओं को उच्च शिक्षा में अधिकार देने की जोरदार वकालत करते हुए योग गुरु ने कहा कि आज भी अंग्रेजी भाषा को महत्व दिया जा रहा है। जिस दिन भारतीय भाषाओं को उच्च शिक्षाओं में महत्व मिल जाएगा, उस दिन गरीब व किसान का बेटा भी आईएएस, इंजीनियर आदि होगा। योग गुरु ने कहा कि लोगतंत्र आज खतरे में है। विभिन्न षड्ïयंत्रों से घिरा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर इसे सुधारा नहीं गया तो लोकतंत्र लुट जाएगा साथ ही षड्यंत्र का शिकार हो जाएगा। उन्होंने अफसोस जताया कि आज देश में समलैंगिकता, गौ हत्या, घर के सामने शराब की दुकान को कानूनी मान्यता दी जा रही है, जो किसी भी स्थिति से सही नहीं है। उपस्थित लोगों को बाबा रामदेव ने स्वदेशी अपनाने व नशा नहीं करने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि हम ऋषि पुत्र हैं और ऋषि पुत्र कहीं शीशी (शराब) पुत्र न बन जाएं, इसके लिए हमें सचेत व संकल्पित रहना होगा। उन्होंने कहा कि सभी धर्मग्रन्थों में नशे को निषेध माना गया है। नशा सिर्फ और सिर्फ नाश का मार्ग है। नशे ने कभी किसी का भला नहीं किया। योग ऋषि ने अपना चैनल योग के साथ सेट करने का आह्वïन करते हुए कहा कि धर्म संस्कृति, सत्य, सेवा, भगवान, सभ्यता आदि के साथ जुड़ोगे तो कभी पतन नहीं होगा। नियमित योग का आह्वïन करते हुए उन्होंने कहा कि आज मुस्लिम समुदाय ने भी योग करने का फतवा जारी कर दिया है। योग से आत्मा व केन्द्र स्वयं के अस्तित्व से जुड़ जाता है और जब आदमी स्वयं में खो जाता है तो वह धोखा नहीं करता है। बाबा रामदेव ने कहा कि जिस सुबह भारत जाग जाएगा उस दिन सम्पूर्ण राष्ट का कायापलट हो जाएगा और भारतीय निरोग हो जाएंगे, उस दिन चिकित्सकों की लूट खसौट भी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री को भी बोलना पड़ा है कि निजी चिकित्सालयों में मरीजों से लूट-खसौट हो रही है। योग ऋषि ने कहा कि महंगी चिकित्सकीय जांच व दवाइयों से बीमारी समाप्त नहीं होगी, लेकिन योग, ध्यान, प्राणायाम व व्यायाम से बीमारी जड़ से नष्टï हो जाती है। योग ऋषि बाबा रामदेव ने स्वयं के चुनाव लडऩे की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि वे किसी प्रकार का कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत स्वाभिमान यात्रा सिर्फ लोगों को जगाने के उद्देश्य से की जा रही है, न कि किसी राजनैतिक उद्देश्य को लेकर। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चुनाव लडऩे का उद्देश्य सिंहासन प्राप्त करना है। जबकि संत का सिंहासन सबसे बड़ा होता है। योग ऋषि ने कहा कि श्रद्धा व विश्वास के साथ श्रेष्ठ राष्ट का निर्माण करना ही इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आज 100 करोड़ लोगों का विश्वास व श्रद्धा उनके साथ है इसलिए उन्हें अन्य किसी पद की लालसा ही नहीं है। अपने निर्धारित समय से करीब सवा दो घंटे देरी से बाबा रामदेव शाम 6.15 बजे जब मंच पर पहुंचे तो हजारों की भीड़ ने गगनभेदी जयघोष के साथ योग गुरु बाबा रामदेव का अभिनन्दन किया। करीब एक घंटे की सभा के दौरान बाबा रामदेव ने लगभग आधे घंटे तक विभिन्न योग क्रियाएं भी उपस्थित जनों को करवाई। उनका तेज गति से हिलता पेट देखकर सभी रौमांचित हो गए। सनातन धर्म की तरफ से प्रेम मुनि जी महाराज, सिख धर्म की तरफ से हरप्रीत चावला, मुस्लिम समुदाय की तरफ से शहर काजी गुलाम कादिर व ईसाई धर्म की तरफ से डी.आर. थॉमस ने योग ऋषि का अभिनन्दन किया। इसके अलावा विधायक गंगाजल मील, नगरपालिका अध्यक्ष इंजी. बनवारी मेघवाल, अतिरिक्त कलेक्टर एस.के. बुडानिया, व्यापार मण्डल अध्यक्ष दीपक भाटिया, पूर्व मंत्री रामप्रताप कासनिया, उप समिति के अध्यक्ष प्रभुदान गेधर, जसवीर सिंह, भैरूदान ठाकरानी, महिला समिति की अध्यक्ष उर्मिला शर्मा, बिमला शर्मा, अनुराधा गुप्ता आदि ने माला पहनाकर बाबा का स्वागत किया।

Friday, September 24, 2010

कभी भी ढह सकता है स्कूली भवन

श्रीगंगानगर । गांव ठाकरांवाली में सरकारी स्कूल का भवन ढहने के कगार पर है। पिछले कुछ दिनों में हुई जोरदार बारिश के कारण स्कूल भवन की छत में दरारें पड़ गई हैं। किसी अनहोनी की आशंका पैदा होने पर सरकारी स्कूल के बच्चों को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे पढ़ाया जा रहा है। स्कूल भवन में दरारें आने की सूचना मिलने पर करणी सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर गंगानगर स्कूल में पहुंचे। उन्होंने इस संबंध में प्रधानाध्यापक से बातचीत करते हुए शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से बातचीत कर वस्तु स्थिति से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से स्कूल के बच्चों को भवन में नहीं बिठाने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों ने भवन की मौके पर जाकर जांच करवाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि स्कूल के भवन की मरम्मत करवाने में अगर समय लगता है, तो वह इसके लिए आर्थिक सहयोग देने को तैयार हैं।

Wednesday, September 22, 2010

महाविद्यालय अगले सत्र में क्रमोन्नत : विधायक मील


सूरतगढ़ । विधानसभा क्षेत्र का एकमात्र राजकीय महाविद्यालय अगले सत्र से स्नातकोत्तर में क्रमोन्नत कर दिया जाएगा। यह आश्वासन उच्च शिक्षा मंत्री जितेन्द्र सिंह ने विधायक गंगाजल मील को दिया। विधायक मील ने जयपुर में मंगलवार को जयपुर में उच्च शिक्षा मंत्री जितेन्द्र सिंह से मुलाकात कर स्थानीय राजकीय महाविद्यालय को क्रमोन्नत करने व व्याख्याताओं के रिक्त पदों को भरने सहित महाविद्यालय की विभिन्न मांगें पूरी करने का आग्रह किया। शिक्षा मंत्री ने अगले सत्र से महाविद्यालय को क्रमोन्नत कर इसमें संस्कृत विषय शुरू करने का आश्वासन दिया। उच्च शिक्षा मंत्री को दिए पत्र में विधायक ने महाविद्यालय को क्रमोन्नत करने के अलावा पूर्व में सरकार द्वारा घोषित संस्कृत विषय शुरू करने, कला वर्ग में अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान, इतिहास व विज्ञान वर्ग में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान तथा वनस्पति विज्ञान व्याख्याताओं के रिक्त पदों को भरने, विज्ञान व कला वर्ग के लिए छ: नये कमरे बनाने, भौतिक सत्यापन के अभाव में बंद पड़े कन्या छात्रावास को शुरू करवाने, महाविद्यालय में स्वपोषित योजनान्तर्गत चल रहे बीसीए व भूगोल विषयों को सरकारी स्तर पर शुरू करने व जनसहभागी योजना के तहत महाविद्यालय में सेमिनार हॉल का निर्माण करवाने की मांग शिक्षा मंत्री से की। उच्च शिक्षा मंत्री ने विधायक गंगाजल मील को आश्वस्त किया कि क्रमोन्नत व संस्कृत विषय अगले वर्ष से शुरू कर दिए जाएंगे। कन्या छात्रावास का भौतिक सत्यापन करवाने के लिए शिक्षा मंत्री ने शिक्षा सचिव को निर्देश दे दिए। इसके अलावा अन्य मांगें शीघ्र ही पूरा करने का आश्वासन भी दिया।

जन चौपाल में सांसद अर्जुन मेघवाल ने की केन्द्र सरकार की खिंचाई


सूरतगढ़ । भारतीय जनता पार्टी के राष्टï्रव्यापी अभियान जन चौपाल के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। भाजपा देहात मण्डल के अध्यक्ष नरेन्द्र घिंटाला की अध्यक्षता में रंगमहल व मोकलसर गांव में आयोजित जन चौपाल में प्रदेश उपाध्यक्ष व सांसद अर्जुन मेघवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि महंगाई, भ्रष्टïचार, आतंकवाद सहित अनेक मुद्दों पर सरकार विफल हो गई है। रंगमहल में जिला महामंत्री रजनी मोदी, राजेन्द्र भादू, पूर्व प्रधान चंदूराम लेघा, किसान मोर्चा अध्यक्ष ओम चाहर, देहात मण्डल के पूर्व अध्यक्ष गुमानाराम पूनिया, कार्यकारिणी सदस्य उजागर सिंह, गुरदर्शन सिंह सोढ़ी, अर्जुन गोदारा, गंगाजल नायक, धर्मदास सिंधी आदि ने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रभुदयाल सिंधी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। रंगमहल के वीर तेजाजी नवयुवक संघ की तरफ से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सांसद अर्जुन मेघवाल ने पौधा लगाकर अभियान का श्रीगणेश किया। इसी तरह भाजपा युवा मोर्चा की तरफ से सूर्यनगरी स्थित वाल्मीकि मन्दिर में जन चौपाल का कार्यक्रम आयोजित किया गया। मोर्चा के अध्यक्ष कृष्ण छींपा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सांसद अर्जुन मेघवाल ने अनेक मुद्दों पर राज्य व केन्द्र सरकार की खिंचाई करते हुए भाजपा की रीति नीति से उपस्थित जनों को अवगत करवाया। इस कार्यक्रम में भाजपा नेता राजेन्द्र भादू, देहात अध्यक्ष नरेन्द्र घिंटाला, पार्षद नत्थूराम भाटिया, विकासदीप गाबा, युवा नेता अशोक आसेरी, गौरव बलाना, राजेन्द्र कायथ, अनिल भार्गव, अशोक सुखीजा, संजय वाल्मीकि, रमेश अठवाल आदि कार्यकर्ता ने विचार व्यक्त किए।
मेघवाल सोमवार रात्रि कामरेड लक्ष्मण शर्मा की चौपाल पर भी कुछ समय के लिए रुके। इस दौरान नागरिक रेल संघर्ष समिति के सदस्यों ने उनके साथ क्षेत्र की रेल समस्याओं बाबत चर्चा की। श्री शर्मा ने बताया कि लालगढ़-अबोहर, अबोहर-जोधपुर, जोधपुर-बठिण्डा, बठिण्डा-लालगढ़, बठिण्डा-अनूपगढ़ तथा अनूपगढ़-बठिण्डा में डिब्बे कम होने के कारण यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह यात्रा करने पर बजबूर होना पड़ रहा है। इसी तरह बीकानेर से चलने वाली हावड़ा गाड़ी तथा जम्मू से बठिण्डा चलने वाली गाड़ी को सूरतगढ़ तक बढ़ाने की मांग लम्बे अर्से से की जा रही है। इस सम्बंध में सांसद ने आश्वस्त किया कि वे रेलवे बोर्ड को भी इन समस्याओं से अवगत करवाएंगे। इस दौरान भाजपा नेता राजेन्द्र भादू, युवा नेता अशोक आसेरी, संघर्ष समिति के ओम राजपुरोहित, शशि राठी, विरेन्द्र सिंह ढिल्लो, भंवर चाण्डक, रतन सोनी, विजय लाहोटी, विमल सिंह राजपुरोहित, दीनबंधु राठी, शेरू सिंधी आदि मौजूद थे। उधर सूरतगढ़ उपखण्ड विकास समिति के अध्यक्ष दिलात्म प्रकाश जैन ने सांसद को ज्ञापन देकर जम्मूतवी-बठिण्डा गाड़ी को सूरतगढ़ तक बढ़ाने की मांग की है। कहा गया है कि इस मांग को लेकर इलाके के लोग पिछले लम्बे समय से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन बठिण्डा में यह गाड़ी 11 घंटे खड़ी रहने के बावजूद लोगों की जायज मांग को पूरा नहीं किया जा रहा है।

Tuesday, September 21, 2010

आम आदमी भयक्रांत और हतोत्साहित है: अर्जुन मेघवाल


सूरतगढ़ । बीकानेर के सांसद व भाजपा के श्रीगंगानगर जिला प्रभारी अर्जुन मेघवाल ने कहा है कि आज पूरा देश महंगाई की मार से कराह रहा है और सरकार कॉमनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार कर चांदी कूट रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र की यूपीए सरकार का व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं रहा और यही कारण है कि देश का आम आदमी भयक्रांत और हतोत्साहित है। सांसद मेघवाल यहां व्यापार मण्डल सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महंगाई और अनाज सडऩे के मुद्दों को लेकर भाजपा ने 18 से 24 सितम्बर तक जन चौपाल कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम के दौरान आम लोगों से इन दो मुद्दों के अलावा स्थानीय मुद्दों पर भी संकल्प पत्र भरवाए जाएंगे। महंगाई के मुद्दे पर भाजपा की क्या सकारात्मक भूमिका रही है? इस सवाल के जवाब में सांसद मेघवाल ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष में है। नीति निर्धारण का कार्य सत्ता पक्ष का होता है। इस मामले में उन्होंने विपक्ष का धर्म निभाते हुए सरकार के कान खींचे हैं, जिसके भविष्य में सकारात्मक परिणाम भी मिलेंगे। सांसद मेघवाल ने कहा कि देश के गोदामों में 58 हजार मैट्रिक टन अनाज सरकार की लापरवाही के कारण सड़ गया। सर्वाेच्च न्यायालय ने जब इस अनाज को गरीबों में मुफ्त बांटने के निर्देश दिए तो सरकार इन निर्देशों को सलाह मानने लगी। उन्होंने कहा कि कॉमन वेल्थ खेलों पर 11 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की बात थी जो अब तक बढ़ते-बढ़ते 35 हजार करोड़ हो चुके हैं। सांसद ने कहा कि यह राशि एक लाख करोड़ तक पहुंच जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। क्योंकि इस राशि से पूरा सरकारी तंत्र अपनी जेबें भरेगा। संसद में सर्वाधिक उपस्थिति का रिकार्ड बनाने के मुद्दे पर चर्चा करते हुए सांसद मेघवाल ने कहा कि जनता ने उन्हें चुनकर संसद में भेजा है। ऐसे में उनका भी दायित्व बनता है कि वे जनता के विश्वास पर खरा उतरे। उन्होंने कहा कि संसद के चलते वे कभी दिल्ली से बाहर नहीं रहे और बिना संसद के वे कभी अपने क्षेत्र से बाहर नहीं रहे। बीकानेर में सांसद सेवा केन्द्र खोलने के सवाल पर सांसद ने कहा कि इसके काफी सकारात्मक परिणाम मिले हैं। अब शीघ्र ही इसे तहसील मुख्यालयों पर खोलने की कवायद शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का प्रत्येक मतदाता किसी भी समय उनसे मिल सके ऐसा सम्भव नहीं है। इस सेवा केन्द्र में 24 घंटे एक कर्मचारी उपस्थित रहता है तथा सेवा केन्द्र में पहुंचने वाले पीडि़त व्यक्ति की बात कम्प्यूटर में फीड कर उसे यथाशीघ्र उन तक पहुंचा देता है।

जेलर भारत भूषण भट्ट



तुम बहुत याद आए...
सूरतगढ़। कहते हैं कि जाने वाले कभी नहीं आते... बस उनकी याद आती है। जेलर भारतभूषण भट्ट आज हमारे बीच नहीं हैं। कल तक जोधपुर सेन्ट्रल जेल में जेलर पद रहे भारतभूषण भट्ट की बस याद ही बाकी रही है। फिल्मों में पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने वाले और जोधपुर सहित प्रदेश की कई जेलों में जेलर रहे भारतभूषण भट्ट की शनिवार को फिल्मी अंदाज में उन्हीं की जेल में असली बंदी ने जान ले ली। इस घटना ने जोधपुर के कला प्रेमियों को ही नहीं बल्कि सूरतगढ़ के नागरिकों को भी स्तब्ध कर दिया। भट्ट का सूरतगढ़ से गहरा सम्बंध रहा है। यूं कहे कि 1970 में हायर सैकेण्डरी उन्होंने सूरतगढ़ राठी स्कूल से ही पास की थी। उस वक्त उनके पिता सी बी भट्ट सूरतगढ़ उपनिवेशन विभाग में सह आयुक्त पद पर तैनात थे। डॉ. टी.एल. अरोड़ा और राजेन्द्र भादू हायर सैकेण्डरी स्कूल में भारतभूषण के सहपाठी हुआ करते थे। अखबारों के जरिए इन्हें भारतभूषण भट्ट की हत्या की सूचना मिली तो उनकी आंखें भर आई। गुजरे जमाने की याद ताजा करते हुए वे कहते हैं कि भारत भूषण अपने छात्र जीवन से ही होनहार छात्रों में शुमार थे। भारत भूषण विभिन्न प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़ कर भाग लिया करते थे और उनमें अव्वल भी रहते। भारतभूषण को अभिनय का शुरू से ही शौक रहा। भट्ट फिल्मों में जाने के इच्छुक थे, लेकिन भाग्य ने उन्हें सरकारी सेवा में पहुंचा दिया। सरकारी सेवा में आने के बाद जैतसर खुली जेल में जेलर रहे। उसके बाद विभिन्न जेलों में रहते हुए जोधपुर सेन्ट्रल जेल में जेलर पद तक पहुंचे। सरकारी सेवा में रहते हुए भी अभिनय का उनका शौक बना रहा। उनका दिल हमेशा कैमरे के सामने आने के लिए ही धड़कता था। वे जेलर थे और कैदियों के बीच रहते जरूर थे लेकिन जेलर जैसी कठोरता कहीं नहीं दिखती थी। फिल्म निर्माता के.सी. बोकाडिय़ा की फिल्म 'तेरी मेहरबानियां' में उन्हें जेलर का रोल मिला। इसके बाद नौकरी करते हुए भट्ट ने 38 फिल्मों में किरदार निभाया । उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। तेरी मेहरबानियां फिल्म में अपना पहला शॉट भट्ट ने मशहूर अभिनेता अमरीश पुरी के साथ दिया था। यह भी अजीब संयोग है कि अमरीश पुरी ने अपनी जिंदगी का अंतिम शॉट भट्ट के साथ दिया था। फिल्म कच्ची सड़क का यह शॉट जोधपुर जेल में फिल्माया गया था। शनिवार को उसी जेल में उनकी हत्या हो गई। गत 27 अगस्त को जोधपुर में प्रदर्शित जयपुर बम ब्लास्ट पर आधारित एनके पारीक निर्देशित फिल्म 13 मई गुलाबी नगर उनकी अंतिम फिल्म थी। हाल के दिनों में उनका मन पूरी तरह बदल गया था। करीब एक महीने पहले भारतभूषण भट्ट ने कहा था, 'बस जेलर की नौकरी छोड़ने ही वाला हूं। अब सिर्फ और सिर्फ अभिनय करूंगा। मैं एक फिल्म भी निर्देशित करने की भी सोच रहा हूं।' वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना चाहते थे।
जेलों में फैले 'जंगलराज' ने एक महान 'शख्सियत' को हमसे छीन लिया है। जो लोग इस शख्सियत के करीब रहे हैं अथवा जो उन्हें जानते हैं उनकी आंखें नम है और उन नम आंखों में 'आंसू' हैं। इस महान 'शख्सियत' की 'शहादत' को हमारा 'सलाम'।

जेलर भारत भूषण भट्ट-video

गूंगा गांव ना बाळी...!


राजस्थानी में एक कहावत प्रचलित है ''गूंगा गांव ना बाळी, भली चेताई।'' राज्यों व केन्द्र सरकार की मनोदशा से लगता है कि ऐसा ही कुछ होने जा रहा है। फैसले की तारीख नजदीक आ रही है। श्रीराम जन्मभूमि के विवादित स्थल पर मालिकाना हक के लिए इसी 24 तारीख को न्यायालय का फैसला आना है। फैसला क्या होगा... ये न्यायालय के अलावा अभी कोई नहीं जानता। लेकिन मीडिया को आने वाले छह-सात दिनों के लिए पूरा मसाला मिल गया है। फैसले की तारीख तक खबरिया चैनल्स चौबीसों घंटे इस मामले को पूरी तरह से न केवल भुनाएंगे बल्कि लोगों को अपने-अपने तरीकों से दिग्भ्रमित करेंगे। विभिन्न राज्यों की सरकारें भी खबरियां चैनलों के इसी ठर्रे को अपने-अपने तरीके से भुनाने में लगी है। फैसले की तारीख तय होने के साथ ही राज्य सरकारों ने सुरक्षा इंतजामों की दुहाई देते हुए केन्द्र से सुरक्षा 'कम्पनियों' की मांग शुरू कर दी है। कोई सरकार पचास कम्पनियां मांग रही है तो कोई सौ। सरकारों की इस मनोदशा से यही लगता है कि वो अपने कत्र्तव्यों, अपने दायित्वों से विमुख हो चुकी है और अपने-अपने राज्यों की सुरक्षा करने में सक्षम नहीं रही। ये फैसला अंतिम नहीं है। इसके बाद भी कई मौके... कई अवसर मिलेंगे अभियुक्तों को। फिर क्यों सरकारें जनता को गुमराह कर रही है। सुरक्षा बलों का लवाजमा लोढऩे के बाद ये तय है कि वे सुरक्षा कर पाएंगी ? सुरक्षा के नाम पर जो करोड़ों का व्यय भार बढ़ेगा उसका खामियाजा कौन भरेगा? आखिर जनता पर ही यह बोझ पडऩे वाला है। सबसे अहम पहलु तो यह है कि राज्य सरकारों की यह बोखलाहट 1990 और 1992 की पुनरावृर्ती के बीज बो रही है। फैसले और फैसले के बाद की स्थिति को लेकर जनता में भले ही कोई विरोध के भाव ना हो लेकिन उसे लेकर जो फैसले के 'राजनीतिकरण' का खेल खेला जा रहा है उससे खुद सरकारों द्वारा 'वैमन्सय' फैलाने की 'बू' आ रही है। सरकारें चाहती है कि फैसले को भुनाकर 'राजनीति' का जामा पहनाया जाए और आगामी चुनावों के लिए वोट बैंक खड़ा किया जाए। धर्म और जाति के झगड़ों पर राजनीति की रोटियां सैक कर ही सरकारें चलती रही है। अब यही रोटियां न्यायालय के फैसले से सेकने की साजिश शुरू हो गई है। सरकारों को न्यायालय के फैसले से कोई सरोकार नहीं। जब तक दंगें नहीं होंगे, उपद्रव नहीं होंगे तब तक इस साजिश को अंजाम पर पहुंचाना कैसे संभव है। सरकारों की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचलों से आम जनता में जो संदेश जा रहा है वह आने वाले कल के लिए ठीक नहीं है।
- राजेंद्र उपाध्याय

Saturday, September 18, 2010

क्षेत्र की प्रथम न्यूज मैग्जीन सीमावर्ती का विमोचन


सहकार की भावना ही दिलाएगी सफलता : डीएसपी

श्रीगंगानगर। डीएसपी हरिराम गहलोत ने कहा कि आज के समय में सफलता प्राप्त करने की एकमात्र नीति सहकार की भावना है। एक सबके लिए और सब एक के लिए की नीति पर चलकर ही उन्नति प्राप्त की जा सकती है। डीएसपी गहलोत क्षेत्र की प्रथम न्यूज मैग्जीन 'सीमावर्ती के विमोचन समारोह में उपस्थित शहर के गणमान्य लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें पहले अपने अंदर झांककर अपनी कमियां दूर करनी चाहिए और उसके बाद ही दूसरों को उपदेश देना चाहिए। दैनिक 'लोकसम्मत के सम्पादक शिव स्वामी ने सीमावर्ती अखबार के संस्थापक-सम्पादक स्व. प्रदूमन कुमार भाटिया की निर्भिक पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए उनके युवा पुत्र संजीव भाटिया से उनके ही नक्शे कदम पर चलने की उम्मीद जताई। दैनिक हांसल के सम्पादक अशोक चुघ ने कहा कि मंझे हुए पत्रकारों के लिए पत्रकारिता जैसा दुरूह कार्य भी खेल के समान ही आसान होता है। वरिष्ठ कांगे्रसी नेता सुदर्शन मल्होत्रा ने पत्रकारिता के सामाजिक मूल्यों तथा आदर्शों का हवाला देते हुए पत्रकारों से सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की अपील की। सदर पुलिस थाना प्रभारी नंदलाल सैनी ने समाज के प्रत्येक वर्ग की मनोदशा का मूल्यांकन करते हुए अंतर्मन से निर्णय लेने की बात कही। मंचासीन अतिथियों ने मैग्जीन 'सीमावर्ती के प्रथम अंक का विमोचन किया। मैग्जीन के प्रधान सम्पादक संजीव भाटिया ने 'सीमावर्ती के प्रकाशन के उद्देश्यों तथा आवश्यकता बताते हुए पत्रकारिता के अनुभव श्रोताओं से सांझा किए। कार्यक्रम में नगर परिषद के चेयरमैन जगदीश जांदू, उद्योगपति व समाजसेवी विजय गोयल, ओबीसी के मुख्य प्रबंधक विनोद गुप्ता, वैश्य आभा के सम्पादक महेश गुप्ता, प्रताप केसरी के संपादक अमित नागपाल सहित शहर के सैकड़ों गणमान्य एवं पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े लोगों ने शिरकत की।

मल्कियत हमारी, ठरका उनका



ऐसे कई दृष्टांत हैं, जो स्थानीय अधिकारियों एवं भू माफिया के मध्य मिलीभगत की ओर इंगित करते हैं। इसी कारण पंजाब में राज्य सरकार की भूमि का अवैध उपयोग, अतिक्रमण लगातार जारी है। यह उस चिट्ठी का हिस्सा है, जो राजस्थान के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलीजेंस) ने जल संसाधन विभाग के प्रमुख शासन सचिव को ज्ञापन के तौर लिखी और उसकी प्रतियां मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग के प्रमुख शासन सचिव को भी भेजी। पंजाब क्षेत्र में राजस्थान फीडर (इंदिरा गांधी नहर) की सम्पत्तियों पर हुए कब्जों को लेकर राज्य सरकार ने ही इंटेलीजेंस से जांच करवाई थी। जांच रिपोर्ट का एक-एक शब्द आंखें खोल देने वाला है। इंटेलीजेंस की यह जांच सिर्फ राजस्थान फीडर तक सीमित थी, लेकिन गंगनहर-पंजाब के हिस्से में जिसे बीकानेर कैनाल कहा जाता है-की सम्पत्तियों पर हुए कब्जों, सैकड़ों की तादाद में लगे हुए टयूबवैलों और मलबे या कब्जों की शिकार होती करोड़ों रुपये की अन्य सम्पत्तियों की ओर किसी का ध्यान ही नहीं है। बीकानेर कैनाल की कई सम्पत्तियां तो पंजाब में गुपचुप बेच दी गई, राजस्थान को इसकी भनक तक नहीं लगी। भनक लगने के बाद भी कोई ठोस कदम उठाये गये हों, किसी भी स्तर पर ऐसा नहीं लगता। राजस्थान फीडर और बीकानेर कैनाल के निर्माण के लिए पंजाब क्षेत्र में राजस्थान ने बाकायदा जमीनें खरीदी। उनके पैसे चुकाये। इंजीनियरों और अफसरों के रहने के लिए मकान, विश्राम गृह, सामान इत्यादि रखने के लिए गोदाम और इसी तरह के अनेक अन्य भवन बनवाये। करोड़ों रुपये की यह सम्पदा सार-संभाल के अभाव में या तो मलबे के ढेर में तब्दील हो रही है या फिर उन पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जे कर लिये हैं। इन सम्पत्तियों को किराये पर देने या बेचने का ख्याल क्यों नहीं आया? यह सवाल खासा ताज्जुब मे डालने वाला है। इंटेलीजेंस की ही जांच साफ तौर पर कहती है कि पंजाब में काफी दूरी तक समानांतर चलने वाली राजस्थान फीडर और सरहिन्द फीडर के बीच का हिस्सा साझा है, लेकिन शेष बची जमीन राजस्थान सरकार की सम्पत्ति है, जिसमें नहर के किनारे लगे हुए पेड़ अवैध कटाई के कारण कम होते जा रहे हैं। पेड़ कटाई के बाद खाली होने वाली जमीन को नजदीकी किसान पहले समतल करते हैं और फिर उसमें खेती का सिलसिला शुरू हो जाता है। शहरों और कस्बों के आसपास की बेशकीमती जमीनों, जो राजस्थान सरकार की सम्पत्ति हैं, भू-माफिया बड़े पैमाने पर हथियाते जा रहे हैं। कहीं पर मैरिज पैलेस बन गये हैं तो कहीं पर आवासीय कॉलोनियां ही काट दी गई हैं। होटलों के निर्माण रातों-रात नहीं हुए, पर राजस्थान वालों को पता भी नहीं लगा। रिपोर्ट के मुताबिक, फरीदकोट से लेकर हरिके पतन तक राजस्थान फीडर के बाएं हिस्से को समतल कर लोगों ने उसे अपनी कृषि भूमि में मिला लिया और वहां टयूबवैल लगा लिये हैं। पम्प सैटों के जरिये कई किलोमीटर तक नहर का पानी चोरी करने का सिलसिला जारी है। आलम यह है कि हजारों की तादाद में पेड़ों के ठूंठ अवैध कटाई के जीते-जागते प्रमाण के तौर पर अभी भी मौजूद हैं। पंजाब के एक अधिशाषी अभियंता ने राजस्थान के हिस्से वाली जमीन में ही लम्बाई-चौड़ाई या अन्य कोई विवरण अंकित किये कुछ लोगों को रास्ते के अधिकार का आदेश पारित कर दिया, जिस आदेश के बाद काफी तादाद में पेड़ काटे गये, लेकिन आदेश में किसी तरह की शर्तों या नियमों का उल्लेख तक नहीं किया गया है। रिपोर्ट में साफ अंकित है कि उक्त विषय न केवल अत्यंत महत्वपूर्ण है बल्कि राजस्थान प्रदेश के हितों से जुड़ा होने के कारण तुरन्त ध्यान में लाये जाने योग्य भी है। यह स्थिति राजस्थान फीडर की है, तो अब बीकानेर कैनाल वाले हिस्से की तरफ देखते हैं। नहर की सीमा के बीच ही सैकड़ों की तादाद में आसपास के किसानों ने टयूबवैल लगा दिये हैं। बीकानेर कैनाल के निर्माण के समय अन्तरराज्यीय समझौते में बाकायदा प्रावधान किया गया था कि नहर का निर्माण सिर्फ राजस्थान को पानी की आपूर्ति के लिए किया जा रहा है और उसमें से एक बूंद पानी भी पंजाब में इस्तेमाल नहीं होगा, पर अब हालत अजीबो-गरीब हैं। एक तरफ राजस्थान के किसान पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं, तो दूसरी तरफ पंजाब में सैकड़ों किसान इसी नहर का पानी टयूबवैलों और पाइप लाइनों के जरिये सात-सात किलोमीटर तक ले जाकर अपने खेतों की फसलों को पाल रहे हैं। लगातार सिंचाई महकमे के अफसरों और सरकार को लिखते रहे किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता एडवोकेट सुभाष सहगल कहते हैं, 'हमारी सम्पत्तियां खुर्द-बुर्द होती चली गई, हमारे हिस्से का पानी दूसरे खोस रहे हैं, पर किसान चाहे कितना भी चीखे-चिल्लायें, सरकार की नींद ही नहीं टूट रही। इंटेलीजेंस की जांच रिपोर्ट को गंभीर मानते हुए जल संसाधन विभाग ने हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता (उत्तर) को खत लिखते हुए वस्तुस्थिति की जानकारी तो मांग ली, साथ ही कब्जों को रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिये। यह निर्देश नीचे के अफसरों तक पहुंचे, लेकिन इसके बाद कार्ययोजना एक तरह से ठण्डे बस्ते में डाल दी गई। अफसोस की बात है कि जहां राजस्थान में खराब वित्तीय हालत का रोना रोया जा रहा है, लेकिन न तो इस करोड़ों रुपये की सम्पत्ति के बेहतर इस्तेमाल के उपायों पर चर्चा होती है और न ही पंजाब में खुलेआम अफसरों और किसानों की मिलीभगत से हो रही पानी की चोरी पर अंकुश लगाये जाने के बारे में सोचा जा रहा है। सहगल के शब्दों में 'अगर पंजाब में अपनी सम्पत्तियों की सार-संभाल पर ही राजस्थान सरकार पूरा ध्यान दे, तो उनसे नहरों के रख-रखाव के लिए जरूरी बजट का काफी हिस्सा हासिल किया जा सकता है। सवाल तो यही है कि ध्यान कौन दे? पिछले सालों में राजस्थान में सरकारें चाहे किसी भी पार्टी की रही, उनके मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक ने दौरे कर हालात को अपनी आंखों से देखा। कार्ययोजनाएं बनाने के ऐलान हुए। जयपुर, चण्डीगढ़ में उच्च स्तरीय बैठकों के लिए लाखों रुपये के भत्ते हवा में उड़ा दिये गये। नतीजा सिफर। ऐसे में इंटेलीजेंस की जांच रिपोर्ट जब यह कहती है कि पंजाब क्षेत्र में किसानों द्वारा पानी की चोरी किये जाने से राजस्थान में आने वाली पानी की मात्रा कम हो जाती है, पानी की उपलब्धता घटने से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति का हमेशा अभाव बना रहता है, जिसका नतीजा किसानों के लगातार आंदोलनों और प्रदर्शनों के रूप में सामने आ रहा है, तो भी नहीं लगता कि यह रिपोर्ट जमीनी स्तर पर किसी तरह के बदलाव का कारण बनेगी।
साभार:आरपी